Bihar Raj Bhavan March: बिहार में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सियासी घमासान लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार को RJD नेता तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन ने पटना में राजभवन मार्च निकाला। विधानसभा चौक से शुरू हुआ यह मार्च राजभवन की ओर करीब 300 मीटर आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने रोक दिया। मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने पांच स्तर की बैरिकेडिंग की थी। इस दौरान तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालांकि, पुलिस ने तेजस्वी यादव या किसी अन्य नेता को औपचारिक रूप से हिरासत में लेने से इनकार किया।
SIR क्या है और तेजस्वी यादव क्यों कर रहे विरोध?
SIR यानी Special Intensive Revision वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। बिहार में इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। महागठबंधन का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव का खतरा है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि BJP के दबाव में SIR प्रक्रिया के नाम पर ‘वोट की चोरी’ की जा रही है।
300 मीटर बाद क्यों रोक दिया गया तेजस्वी यादव का मार्च?
विधानसभा चौक से शुरू हुआ तेजस्वी यादव का राजभवन मार्च जैसे ही आगे बढ़ा, पुलिस ने रास्ते में भारी बैरिकेडिंग कर दी। महागठबंधन के नेता और कार्यकर्ता बैरिकेड पार करने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। करीब 300 मीटर की दूरी तय करने के बाद पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी यादव की औपचारिक गिरफ्तारी या हिरासत नहीं हुई।
पटना में पांच-स्तरीय बैरिकेडिंग, RAF और वॉटर कैनन तैनात
महागठबंधन के प्रदर्शन को देखते हुए पटना में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। संवेदनशील इलाकों में पुलिस के साथ Rapid Action Force यानी RAF के जवानों की तैनाती की गई। पुलिस ने राजभवन जाने वाले रास्ते पर पांच-स्तरीय बैरिकेडिंग की थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वॉटर कैनन भी स्टैंडबाय पर रखे गए थे। प्रदर्शन के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा।
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
राजभवन मार्च के दौरान तेजस्वी यादव और महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। RJD MLC सुनील सिंह ने प्रदर्शन के दौरान लोकतंत्र को लेकर चिंता जताई और कहा कि वे इसके खिलाफ विरोध जारी रखेंगे। वहीं, RJD नेता भाई वीरेंद्र ने भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया।
मार्च रुकने के बाद राज्यपाल से मिले तेजस्वी यादव
पुलिस द्वारा मार्च को रोक दिए जाने के बाद तेजस्वी यादव और महागठबंधन के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के सामने SIR प्रक्रिया, वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। राज्यपाल से मुलाकात के बाद राजभवन मार्च का कार्यक्रम समाप्त हो गया।
534 ब्लॉक से पटना राजभवन तक महागठबंधन का विरोध
SIR के खिलाफ महागठबंधन ने बिहार में चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम बनाया था। 7 अक्टूबर को बिहार के सभी 534 ब्लॉक मुख्यालयों पर विरोध मार्च और पुतला दहन किया गया। इसके बाद जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन हुए और फिर पटना में राजभवन मार्च निकाला गया। पटना के अलावा नालंदा और भागलपुर में भी SIR को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। नालंदा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका और उन्हें हटाने की मांग की। भागलपुर में भी विपक्षी कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर नारेबाजी की।
Bihar Politics में SIR बना बड़ा चुनावी मुद्दा
बिहार में SIR, वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में हुआ राजभवन मार्च इसी विरोध की अगली बड़ी कड़ी रहा। अब नजर इस बात पर है कि महागठबंधन SIR के मुद्दे पर आगे क्या रणनीति अपनाता है और चुनाव आयोग इस पूरे राजनीतिक विवाद पर क्या अगला कदम उठाता है। तेजस्वी यादव का राजभवन मार्च करीब 300 मीटर बाद रोक दिया गया, लेकिन इसके बाद महागठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर SIR और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दे उठाए। बिहार की राजनीति में अब SIR विवाद और चुनाव आयोग की भूमिका बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है।