Gujarat e-Gram Project Tender Controversy: गुजरात सरकार के ई-ग्राम प्रोजेक्ट को लेकर सरकारी खर्च, कंप्यूटर खरीद और कर्मचारियों की नौकरी पर सवाल उठाए गए हैं। गुजरात स्टेट तालुका लेवल एग्जीक्यूटिव (TLE) एसोसिएशन ने करीब ₹300 करोड़ के टेंडर, ₹36 करोड़ के Microsoft Office लाइसेंस और लगभग 1,500 कर्मचारियों को हटाए जाने के दावों पर चिंता जताई है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच और कर्मचारियों की बहाली की मांग की है।
₹2 करोड़ की AMC और ₹300 करोड़ के टेंडर पर विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, ई-ग्राम प्रोजेक्ट के सालाना मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) की करीब ₹2 करोड़ लागत को लेकर पहले सवाल उठे थे। अब गुजरात इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड (GIL) के माध्यम से लगभग ₹300 करोड़ के टेंडर की खबरों ने विवाद बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि 12,000 से अधिक कंप्यूटरों की खरीद के लिए करीब ₹150 करोड़ और Microsoft Office लाइसेंस के लिए ₹36 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है। प्रिंटर, वेबकैम और फिंगरप्रिंट स्कैनर जैसे उपकरणों की खरीद भी चर्चा में है। TLE एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि यदि मौजूदा सिस्टम का रखरखाव महंगा था, तो नई खरीद पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी? हालांकि, टेंडर की शर्तों, कुल लागत और खरीद के औचित्य की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी जरूरी है।
ई-ग्राम प्रोजेक्ट के 1,500 कर्मचारियों का क्या होगा?
TLE एसोसिएशन के मुताबिक, ई-ग्राम प्रोजेक्ट से जुड़े लगभग 1,500 कर्मचारी वर्षों से गुजरात के ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सेवाएं दे रहे थे। संगठन का दावा है कि कई कर्मचारी 2007 से काम कर रहे थे और उनके पास BCA तथा PGDCA जैसी योग्यताएं और क्षेत्रीय अनुभव है। एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारियों को हटाए जाने से उनकी आजीविका पर असर पड़ा है। संगठन ने पुराने कर्मचारियों के अनुभव और नई भर्ती व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
EET प्रोजेक्ट के तहत नियुक्तियों का आरोप
एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि ई-ग्राम प्रोजेक्ट बंद होने की घोषणा के बाद भी इससे जुड़े कुछ काम EET नामक अलग मैनपावर प्रोजेक्ट के तहत जारी रहे। संगठन के अनुसार, इस व्यवस्था में करीब 30 लोगों की नियुक्ति की बात भी सामने आई है। एसोसिएशन ने मांग की है कि संबंधित विभाग इस व्यवस्था और नियुक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट करे। इन दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और विभाग का पक्ष महत्वपूर्ण है।
Microsoft Office लाइसेंस पर ₹36 करोड़ का खर्च
Microsoft Office लाइसेंस के लिए ₹36 करोड़ खर्च किए जाने की खबर पर भी सवाल उठे हैं। एसोसिएशन ने पूछा है कि जब ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के विकल्प उपलब्ध हैं, तो महंगे लाइसेंस खरीदने की जरूरत क्यों है। हालांकि, सॉफ्टवेयर की लागत का आकलन लाइसेंस की अवधि, उपयोगकर्ताओं की संख्या, सुरक्षा, तकनीकी जरूरतों और सपोर्ट सेवाओं के आधार पर किया जाना चाहिए। इसलिए खरीद के पूरे विवरण के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
मुख्यमंत्री से ACB जांच और कर्मचारियों की बहाली की मांग
TLE एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रतीक कप्तेल की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने की खबर है। संगठन ने कथित अनियमितताओं की एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) से जांच कराने, करीब ₹300 करोड़ के टेंडरों की समीक्षा या रद्द करने, AMC व्यवस्था फिर शुरू करने और हटाए गए कर्मचारियों को वापस काम पर रखने की मांग की है। एसोसिएशन ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और संपत्ति की जांच की मांग भी की है। ये संगठन के आरोप और मांगें हैं, किसी जांच में सिद्ध निष्कर्ष नहीं।
गुजरात ई-ग्राम टेंडर विवाद में अब क्या होगा?
गुजरात ई-ग्राम प्रोजेक्ट विवाद में अब टेंडर की लागत, सरकारी खरीद की प्रक्रिया और कर्मचारियों के भविष्य पर सरकार का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा। यदि जांच होती है, तो उससे खर्च के औचित्य, खरीद प्रक्रिया और कर्मचारियों की स्थिति से जुड़े सवालों पर स्पष्टता आ सकती है।