ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष लाएगा अविश्वास प्रस्ताव
संसद के बजट सत्र में राहुल गांधी को बोलने से रोकने पर अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

ओम बिरला

ओम बिरला
संसद के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है, जिससे जुड़ा संसद समाचार देश की राजनीति में हलचल मचा रहा है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब के अंश पढ़ना चाहते थे, लेकिन स्पीकर ने इसकी अनुमति नहीं दी। इस के अनुसार, विपक्ष का आरोप है कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का उचित मौका नहीं दिया जा रहा है, जिसके विरोध में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में एक बड़ी रणनीतिक बैठक भी बुलाई गई।
राहुल गांधी के भाषण पर विवाद
आज सुबह से ही लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इस समाचार में यह स्पष्ट किया गया है कि विपक्ष की मुख्य नाराजगी राहुल गांधी को अपनी बात पूरी न करने देने को लेकर है। विपक्षी नेताओं, जिनमें TMC की शताब्दी रॉय और सपा के रामगोपाल यादव शामिल हैं, ने एकजुट होकर निर्णय लिया है कि यदि बोलने की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, तो वे स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। यह संकेत दे रहे हैं कि विपक्षी दल जल्द ही लोकसभा महासचिव को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप सकते हैं। बजट सत्र की शुरुआत में ही इस तरह का गतिरोध सरकार के लिए विधायी कार्यों को पूरा करने में बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
रणनीति और आगे की राह
संसद परिसर में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक में आगामी दिनों के लिए कड़ी रणनीति तय की गई है। इस समाचार के केंद्र में अब केवल बजट पर चर्चा नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र और स्पीकर की निष्पक्षता का मुद्दा भी आ गया है। विपक्ष का तर्क है कि सदन के भीतर निर्वाचित प्रतिनिधियों की आवाज दबाना लोकतंत्र के खिलाफ है। वहीं, सत्ता पक्ष इस हंगामे को बजट सत्र की कार्यवाही में बाधा डालने की कोशिश करार दे रहा है। 9 फरवरी की यह तारीख के इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव की यह नोटिस संसदीय मर्यादाओं और विपक्ष की आक्रामकता की नई परीक्षा होगी। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच सुलह का कोई रास्ता निकलता है या बवाल और बढ़ेगा।