SIR विवाद में आया नया ट्विस्ट! जस्टिस भुइयां के बयान के बाद CEC ज्ञानेश कुमार पर क्यों बढ़ा दबाव?
जस्टिस भुइयां की टिप्पणी से गरमाया SIR विवाद

SIR विवाद में जस्टिस भुइयां का बयान

SIR विवाद में जस्टिस भुइयां का बयान
CEC Gyanesh Kumar Controversy: चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी और कानूनी घमासान तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने मताधिकार और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया के संवैधानिक पहलुओं पर कड़ी टिप्पणी की, जिसके बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग पर हमला और तेज कर दिया। इसी बीच, 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने वोट के अधिकार पर क्या कहा?
हैदराबाद स्थित NALSAR University of Law के एक कार्यक्रम में जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने मतदान के अधिकार और मतदाता सूची में नाम शामिल होने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रक्रिया बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करती है और उन्हें वोटिंग अधिकार से रहित नागरिकों की स्थिति में पहुंचाती है, तो ऐसी प्रक्रिया मनमानी हो सकती है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 326 से जुड़े सिद्धांतों के संदर्भ में समझाया। जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि किसी नागरिक के मतदाता सूची में शामिल होने के अधिकार को उसकी नागरिकता से अलग नहीं किया जा सकता। हालांकि, उनकी ये टिप्पणियां व्यापक संवैधानिक संदर्भ में थीं और इन्हें सीधे मौजूदा SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का हमला
जस्टिस भुइयां की टिप्पणियों के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर अपने हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जस्टिस भुइयां की टिप्पणियों का हवाला देते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता जरूरी है। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी जस्टिस भुइयां की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके बयान को महत्वपूर्ण बताया।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिकाएं हैं?
सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज और चुनाव आयोग के कुछ फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाएं दाखिल की गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, याचिकाओं में CEC को निलंबित करने, कुछ फैसलों को रद्द करने, SIR से जुड़े निर्णयों की जांच और चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर सिस्टम के फॉरेंसिक ऑडिट जैसी मांगें उठाई गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से चुनाव आयोग के कुछ फैसलों को लेकर प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों और मांगों पर अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने वाला है। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच करेगी। SIR विवाद के बीच होने वाली यह सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चुनाव आयोग के कामकाज, CEC के फैसलों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए गए कानूनी सवालों पर अदालत का रुख सामने आ सकता है।
दिल्ली से मुंबई तक SIR के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
SIR और वोटर लिस्ट विवाद अब अदालत से निकलकर सड़क तक भी पहुंच चुका है। विपक्षी दलों और कई संगठनों ने दिल्ली, मुंबई समेत अलग-अलग जगहों पर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। विपक्षी दल CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध जता रहे हैं। INDIA गठबंधन की ओर से भी चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध कार्यक्रमों और मार्च का ऐलान किया गया है। मुंबई में भी विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
चुनाव आयोग और BJP का क्या कहना है?
विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग अपनी SIR प्रक्रिया का बचाव कर रहा है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया को दुरुस्त रखने और योग्य मतदाताओं की सूची सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। BJP ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पूरे विवाद को राजनीतिक मुद्दा बताया है। इससे साफ है कि SIR विवाद में विपक्ष बनाम चुनाव आयोग-BJP की राजनीतिक टक्कर लगातार तेज हो रही है।
जस्टिस भुइयां के बयान से क्यों बढ़ा विवाद?
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणियों ने ऐसे समय में राजनीतिक बहस को हवा दी है, जब SIR के जरिए मतदाता सूची में बदलाव को लेकर पहले से ही कानूनी और राजनीतिक विवाद चल रहा है। उनका मुख्य जोर इस बात पर था कि नागरिकों को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने वाली कोई प्रक्रिया संवैधानिक सिद्धांतों की कसौटी पर परखी जानी चाहिए। इसी बयान को विपक्ष ने चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने राजनीतिक तर्क को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया है।
अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी नजरें
CEC ज्ञानेश कुमार, SIR, Election Commission और Voter List से जुड़ा विवाद अब एक अहम कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। 5 अक्टूबर की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में अदालत का रुख इस पूरे मामले की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल विपक्ष चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग और BJP आरोपों को खारिज कर रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके बाद आने वाली कानूनी तस्वीर पर है।
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