बूथ लेवल अफ़सरों की मुश्किलें कम करें: सुप्रीम कोर
राज्यों को स्टाफ बढ़ाने, छूट देने और अत्यधिक काम का बोझ घटाने के निर्देश

बूथ लेवल अफ़सरों की मुश्किलें कम करें: सुप्रीम कोर्ट

बूथ लेवल अफ़सरों की मुश्किलें कम करें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) में लगे बूथ लेवल अफ़सरों (BLOs) की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्यों को आदेश दिया कि वे अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती करें, जिससे BLOs का कार्यभार और काम के घंटे कम किए जा सकें।
पीठ ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर ड्यूटी से छूट मांगने वाले BLOs के अनुरोधों पर मामला-दर-मामला आधार पर विचार होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई अधिकारी व्यक्तिगत कारणों से छूट चाहता है, तो राज्य सरकार उसका अनुरोध जांचे और उसकी जगह किसी अन्य कर्मचारी की नियुक्ति करे।
याचिका में BLOs पर बढ़ते दबाव, आत्महत्या के मामलों और कथित आपराधिक कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। तमिलागा वेत्री कज़गम (TVK) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि तमिलनाडु में 35–40 BLOs ने आत्महत्या की है, जबकि उत्तर प्रदेश में पिछले 12 दिनों में 10 BLO मौतों के मामले सामने आए हैं—जिनमें तीन आत्महत्याएँ भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई BLOs, जिनमें आंगनवाड़ी और शिक्षक भी शामिल हैं, को आरपी अधिनियम की धारा 32 के तहत नोटिस देकर जेल तक की चेतावनी दी जा रही है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से कहा कि वे BLOs के लिए बेहतर कार्य-स्थितियाँ सुनिश्चित करें और जरूरत पड़ने पर उन्हें राहत दें। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि यदि BLOs या उनके परिवारों को मुआवज़े या किसी अन्य राहत को लेकर शिकायतें हैं, तो वे आगे चलकर उचित आवेदन दायर कर सकते हैं।