Long COVID Research: कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद भी कई लोगों को सांस लेने में परेशानी, लगातार थकान, ब्रेन फॉग और पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अब 771 मरीजों पर हुई एक नई वैज्ञानिक रिसर्च में लॉन्ग कोविड के इन लक्षणों और मुंह व फेफड़ों में मौजूद बैक्टीरिया के समुदाय यानी माइक्रोबायोम के बीच संबंध सामने आया है। European Respiratory Journal में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, कोविड-19 के बाद लंबे समय तक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों में मुंह और श्वसन तंत्र के माइक्रोबायोम की संरचना अलग पाई गई। शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया में इन बदलावों का संबंध फेफड़ों की कम कार्यक्षमता, सोचने-समझने से जुड़ी समस्याओं और पाचन संबंधी लक्षणों से भी देखा। हालांकि, यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि बैक्टीरिया में बदलाव ही लॉन्ग कोविड का कारण हैं। इसके लिए आगे और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है।
लॉन्ग कोविड क्या है? कोरोना के बाद क्यों नहीं खत्म होते लक्षण?
लॉन्ग कोविड ऐसी स्थिति है, जिसमें कोविड-19 संक्रमण के बाद भी कई लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं। कुछ मरीजों को थकान, सांस फूलना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, याददाश्त से जुड़ी समस्याएं और पाचन संबंधी परेशानियां होती हैं। वैज्ञानिक अभी तक लॉन्ग कोविड के सभी कारणों को पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, सूजन, अंगों की कार्यक्षमता और माइक्रोबायोम में बदलाव संभावित भूमिका निभा सकते हैं। माइक्रोबायोम शरीर के किसी हिस्से में रहने वाले बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीवों का समुदाय होता है। यह शरीर की कई जैविक प्रक्रियाओं से जुड़ा है और इसके असंतुलन का स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
771 मरीजों पर हुई स्टडी में कैसे हुई जांच?
यह शोध ब्रिटेन के PHOSP-COVID अध्ययन का हिस्सा था। इसमें फरवरी 2020 से मार्च 2021 के बीच 38 अस्पतालों में कोविड-19 का इलाज करा चुके 771 वयस्कों के माइक्रोबायोम का विश्लेषण किया गया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के लगभग छह महीने बाद मरीजों के मुंह से लार या ओरल रिंस और श्वसन तंत्र से बलगम के नमूने लिए गए। डीएनए सीक्वेंसिंग तकनीक से इन नमूनों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की पहचान की गई। इसके बाद शोधकर्ताओं ने माइक्रोबायोम के पैटर्न की तुलना मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति और उनके लक्षणों से की। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि बैक्टीरिया के समुदायों में अंतर और लॉन्ग कोविड की गंभीरता के बीच क्या संबंध हो सकता है।
फेफड़ों के बैक्टीरिया और ब्रेन फॉग के बीच क्या संबंध मिला?
अध्ययन में अलग-अलग लक्षणों के साथ माइक्रोबायोम के अलग पैटर्न जुड़े पाए गए।
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ब्रेन फॉग और न्यूरोकॉग्निटिव समस्याएं: सोचने, ध्यान लगाने और याददाश्त से जुड़ी परेशानियों का संबंध मुंह के माइक्रोबायोम के कुछ अलग पैटर्न से देखा गया।
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फेफड़ों की कम कार्यक्षमता: फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी का संबंध भी मुंह में मौजूद बैक्टीरिया के समुदाय में बदलाव से मिला।
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पाचन संबंधी लक्षण: गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल यानी पाचन संबंधी समस्याओं का संबंध बलगम के नमूनों में पाए गए माइक्रोबायोम के पैटर्न से देखा गया।
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गंभीर लॉन्ग कोविड: अधिक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों में माइक्रोबायोम की संरचना अलग पाई गई।
ये निष्कर्ष संकेत देते हैं कि लॉन्ग कोविड का अध्ययन करते समय मुंह और श्वसन तंत्र में रहने वाले सूक्ष्मजीवों की भूमिका को भी समझना जरूरी है।
लॉन्ग कोविड में लैक्टिक एसिड बनाने वाले बैक्टीरिया क्यों चर्चा में हैं?
रिसर्च में कुछ लैक्टिक एसिड बनाने वाले बैक्टीरिया की अधिक मौजूदगी और खराब स्वास्थ्य परिणामों के बीच संबंध देखा गया। इन बैक्टीरिया के स्तर का संबंध खून में सूजन से जुड़े कुछ प्रोटीनों से भी पाया गया। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि ये बैक्टीरिया सीधे लॉन्ग कोविड पैदा करते हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि बैक्टीरिया में बदलाव बीमारी के कारण हुए या संक्रमण के बाद शरीर में हुए अन्य बदलावों के परिणामस्वरूप सामने आए।
क्या माइक्रोबायोम से लॉन्ग कोविड का नया इलाज मिल सकता है?
यह अध्ययन भविष्य में लॉन्ग कोविड की बेहतर समझ और संभावित उपचारों पर शोध के लिए उपयोगी हो सकता है। यदि आगे के अध्ययन माइक्रोबायोम और लक्षणों के बीच संबंध की पुष्टि करते हैं, तो बैक्टीरिया के संतुलन को प्रभावित करने वाले उपचारों की उपयोगिता की जांच की जा सकती है। फिलहाल, इस रिसर्च के आधार पर किसी एंटीबायोटिक, प्रोबायोटिक या अन्य माइक्रोबायोम-आधारित उपचार को लॉन्ग कोविड का प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता। इसके लिए नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल और अतिरिक्त वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं।
लॉन्ग कोविड के लक्षण दिखें तो क्या करें?
कोविड-19 के बाद यदि लगातार थकान, सांस लेने में तकलीफ, ब्रेन फॉग या पाचन संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। सांस लेने में गंभीर परेशानी या अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। सिर्फ इस अध्ययन के आधार पर खुद से एंटीबायोटिक्स लेना या माइक्रोबायोम बदलने वाला उपचार शुरू करना उचित नहीं है।