बजट 2026: आज राहत, कल कर्ज?
कर छूट से सुकून, लेकिन बढ़ता उधार और कर्ज चिंता बढ़ाता है
केंद्रीय वित् मंत्री निर्मला सीथारमन अपनी टीम के साथ
केंद्रीय वित् मंत्री निर्मला सीथारमन अपनी टीम के साथ
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया यूनियन बजट 2026-27 एक संतुलन साधने की कोशिश है। एक ओर यह मध्यम वर्ग और वेतनभोगी करदाताओं को सीधी राहत देता है, वहीं दूसरी ओर ऊँचे सरकारी खर्च, बढ़ते उधार और कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
बजट की सबसे बड़ी घोषणा यह है कि ₹12.75 लाख तक की वार्षिक आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन यह राहत उतनी व्यापक नहीं है जितनी पहली नज़र में लगती है।
खर्च ज्यादा, आय कमवित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार का कुल खर्च ₹53.5 लाख करोड़ आंका गया है, जबकि नॉन-डेट रसीदें ₹36.5 लाख करोड़ रहेंगी। इस बड़े अंतर को सरकार बाज़ार से उधार और छोटी बचत योजनाओं से मिलने वाले ब्याज के जरिए पूरा करेगी।
सरकार ने ₹17 लाख करोड़ का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) तय किया है, जो 2023-24 की तुलना में लगभग ₹4 लाख करोड़ अधिक है। हालांकि, महंगाई को ध्यान में रखें तो वास्तविक बढ़ोतरी सीमित ही है। यह खर्च अर्थव्यवस्था को सहारा तो देगा, लेकिन तेज़ रफ्तार बदलाव के लिए पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।
बढ़ता उधार क्या संकेत देता हैबजट के अनुसार, ₹17.2 लाख करोड़ का सकल बाज़ार उधार लिया जाएगा, जिसमें से ₹11.7 लाख करोड़ शुद्ध उधार होगा। इससे तीन अहम असर पड़ते हैं:
भविष्य में ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ेगा
निजी निवेश के लिए पूंजी महंगी हो सकती है
किसी वैश्विक संकट में सरकार की वित्तीय गुंजाइश घटेगी
हालांकि राजकोषीय घाटा 4.3% पर रखा गया है, जो पिछले वर्ष से थोड़ा कम है, फिर भी यह अब भी ऊँचे स्तर पर है।
कर्ज-से-जीडीपी 55%: कितना खतरनाक?बजट अनुमान के मुताबिक, कर्ज-से-जीडीपी अनुपात 55.6% रहेगा। वैश्विक मानकों के हिसाब से यह असामान्य नहीं है, लेकिन भारत के लिए चुनौती यह है कि सरकारी आय का बड़ा हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में चला जाता है।
इस स्तर पर कर्ज होने का मतलब है कि सरकार को तेज़ और स्थिर आर्थिक विकास बनाए रखना ही होगा, ताकि कर्ज संभाल में रहे।
इनकम टैक्स राहत: सच्चाई क्या हैनई कर व्यवस्था बजट का मुख्य आधार बनी हुई है।
₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन और धारा 87A के तहत ₹60,000 तक की छूट के साथ, ₹12.75 लाख तक कमाने वाले वेतनभोगी करदाता टैक्स के दायरे से बाहर रहेंगे।
लेकिन यह राहत:
केवल नई कर व्यवस्था चुनने वालों को मिलेगी
पुरानी कर व्यवस्था में कटौतियों का कोई खास विस्तार नहीं
सभी करदाताओं पर समान रूप से लागू नहीं
यानी राहत वास्तविक है, लेकिन सीमित दायरे में।
पुरानी कर व्यवस्था को स्पष्ट संदेशधारा 80C, 80D और होम लोन कटौतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। इससे साफ है कि सरकार कटौती-आधारित पुरानी व्यवस्था से धीरे-धीरे दूरी बना रही है।
निष्कर्षयूनियन बजट 2026-27 आज के लिए राहत और भविष्य के लिए जिम्मेदारी दोनों की कहानी कहता है। आम आदमी को कर में थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए तेज़ विकास ही बढ़ते कर्ज का एकमात्र समाधान है।