सोने और चांदी की कीमतों में 5% की गिरावट
चांदी की कीमतों में ₹14,600 से ज़्यादा की गिरावट; शुरुआती गिरावट के बाद सोने की कीमतों में

एक ही दिन में चांदी में 5% 'भूकंप'

एक ही दिन में चांदी में 5% 'भूकंप'
भारतीय कीमती धातुओं के बाज़ार ने फरवरी 2026 के पहले हफ़्ते में ही निवेशकों की सांसें रोक दी हैं। ग्लोबल आर्थिक गतिविधियों का सीधा असर भारतीय कमोडिटी बाज़ार (MCX) पर देखा जा रहा है। आज 6 फरवरी, 2026 को बाज़ार खुलते ही जिस तरह चांदी में तेज़ी आई है, उसने हाल की तेज़ी पर ब्रेक लगा दिया है।
शुक्रवार सुबह जब MCX बाज़ार खुला तो चांदी के निवेशकों के लिए चौंकाने वाली खबर आई। चांदी का पिछला बंद भाव ₹2,43,815 था, जिसके मुकाबले आज बाज़ार खुलते ही भाव ₹2,34,063 पर आ गया था। हालांकि, यह गिरावट यहीं नहीं रुकी और कुछ ही मिनटों में चांदी ₹2,29,187 के लेवल पर आ गई थी। इस तरह, कुछ ही घंटों में चांदी की कीमत में करीब 5% की गिरावट आई, यानी ₹14,628 प्रति kg.
सोने की कीमतों में रिकवरी की कोशिश
दूसरी तरफ, सोने की हालत भी शुरू में डांवाडोल दिखी। सोना कल ₹1,52,071 पर बंद हुआ था, जो आज सीधे ₹1,49,396 पर खुला। यानी, सुबह के सेशन में ही सोने में ₹2,675 की गिरावट देखी गई थी। हालांकि, सोने में निवेशकों के भरोसे के कारण निचले स्तर से खरीदारी हुई। नतीजतन, सोना रिकवर करते हुए ₹1,50,700 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा, जिससे सुबह की बड़ी गिरावट घटकर सिर्फ ₹1,371 पर आ गई।
गिरावट के मुख्य कारण: क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
मार्केट एनालिस्ट इस बड़ी गिरावट के लिए कुछ ग्लोबल वजहों को ज़िम्मेदार मान रहे हैं:
1. चीन की 'पैनिक सेलिंग': चीनी मार्केट में चांदी की कीमतों में अचानक 15% की गिरावट आई। चूंकि चीन इंटरनेशनल लेवल पर चांदी का एक बड़ा कंज्यूमर है, इसलिए इसका सीधा असर भारतीय मार्केट पर पड़ा है।
2. डॉलर इंडेक्स का मजबूत होना: जैसे-जैसे US डॉलर दूसरी करेंसी के मुकाबले मजबूत होता है, सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव आमतौर पर बढ़ जाता है।
3. इंटरेस्ट रेट में अनिश्चितता: पश्चिमी देशों में सेंट्रल बैंकों द्वारा इंटरेस्ट रेट में बनी अनिश्चितता को देखते हुए इन्वेस्टर इस समय प्रॉफिट बुकिंग की ओर रुख कर रहे हैं।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या सिग्नल है?
चांदी की कीमतों में तेज गिरावट, जो हाल ही में अपने सबसे ऊंचे लेवल पर थीं, आम इन्वेस्टर के लिए चिंता की बात है। हालांकि, जो इन्वेस्टर लंबे समय के लिए सोने में इन्वेस्ट करना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट एक मौका साबित हो सकती है। सोने में दिख रही रिकवरी इस बात का सबूत है कि जब भी कीमत गिरती है, तो बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है क्योंकि सोने को अभी भी 'सेफ हेवन' यानी सुरक्षित इन्वेस्टमेंट माना जाता है। भविष्य की संभावनाएं: क्या उतार-चढ़ाव बना रहेगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक मार्केट में ऐसी 'उतार-चढ़ाव' (बढ़ोतरी) देखने को मिल सकती है। जब तक ग्लोबल लेवल पर कोई स्टेबल सिग्नल नहीं मिलते, कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। शादियों के सीजन की वजह से ज्वेलरी की डिमांड बढ़ सकती है, जिससे कीमतों को थोड़ा सपोर्ट मिल सकता है। लेकिन अभी के लिए, इन्वेस्टर्स के लिए "वेट एंड वॉच" पॉलिसी अपनाना ज़रूरी है।