99% भारतीय निर्यात पर अब नहीं लगेगी ड्यूटी
PM मोदी की ओमान यात्रा के दौरान भारत और ओमान ने CEPA पर हस्ताक्षर किए हैं

PM मोदी की ओमान यात्रा

PM मोदी की ओमान यात्रा
भारत और ओमान ने व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए 18 दिसंबर को एक ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। PM नरेंद्र मोदी की ओमान यात्रा के दूसरे दिन इस महत्वपूर्ण समझौते को अंतिम रूप दिया गया, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक नया अध्याय शुरू करेगा। इस समझौते के तहत ओमान के 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारत को शून्य-शुल्क पहुंच प्राप्त होगी, जो मूल्य के आधार पर कुल भारतीय निर्यात का लगभग 99.38 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। इस रणनीतिक कदम से खाड़ी देशों में भारतीय सामानों की मांग और पहुंच में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
वैश्विक बाजार में बड़ी प्रतिस्पर्धी
इस CEPA समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मिलने वाला है, जिनमें रत्न और आभूषण, कपड़ा, चमड़ा, जूते, खेल का सामान और कृषि उत्पाद शामिल हैं। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, प्लास्टिक, फर्निचर, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों को भी पूर्ण टैरिफ उन्मूलन के दायरे में रखा गया है। विशेष बात यह है कि इनमें से 97.96 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर ओमान द्वारा तत्काल प्रभाव से सीमा शुल्क समाप्त कर दिया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बड़ी प्रतिस्पर्धी बढ़त हासिल होगी।
आने वाले वर्षों में व्यापार घाटे को कम करने में मदद
जवाब में भारत ने भी ओमान के लिए अपनी बाजार पहुंच का विस्तार किया है, जहां भारत अपनी लगभग 78 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में कटौती करेगा। यह ओमान से होने वाले लगभग 95 प्रतिशत आयात को कवर करेगा, हालांकि भारत ने अपने संवेदनशील उत्पादों की सुरक्षा के लिए मुख्य रूप से टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) के माध्यम से पहुंच प्रदान की है। इस संतुलित CEPA समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित और संवर्धित करना है, जिससे आने वाले वर्षों में व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी।
व्यापार की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी
भारत और ओमान के बीच इस व्यापार समझौते की नींव नवंबर 2023 में रखी गई थी, जिसके बाद वार्ता के पांच दौर चले और अगस्त 2025 में इसे सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। भारत वर्तमान में ओमान का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक विश्वास को दर्शाता है। यह CEPA समझौता न केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित है, बल्कि यह भविष्य में सेवाओं और तकनीकी सहयोग के लिए भी एक मजबूत ढांचा तैयार करता है, जिससे व्यापार की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हो जाएगी।
कंपनियों की सक्रियता तेजी से बढ़ी
निवेश के मोर्चे पर भी ओमान में भारतीय कंपनियों की सक्रियता तेजी से बढ़ी है और 2020 के बाद से भारतीय निवेश तीन गुना से अधिक होकर 5 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। यह निवेश मुख्य रूप से ग्रीन स्टील, ग्रीन अमोनिया, एल्यूमीनियम निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और रसद (लॉजिस्टिक्स) जैसे भविष्यवादी क्षेत्रों में फैला हुआ है। CEPA के लागू होने से इन क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों के बीच औद्योगिक एकीकरण को मजबूती मिलेगी, जिससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उत्पादों को विश्व स्तरीय मंच प्रदान करने की दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों (जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान) की यात्रा का मस्कट अंतिम पड़ाव था, और इस यात्रा ने पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साथ भारत के सामरिक संबंधों को और मजबूत किया है। CEPA पर हस्ताक्षर के साथ भारत ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और अधिक गहरा करने का संकेत दिया है। यह समझौता आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर ले जाने और 'मेक इन इंडिया' उत्पादों को विश्व स्तरीय मंच प्रदान करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।