बीमा विधेयक पास, एफडीआई सीमा 100% हुई
वित्त मंत्री ने कहा—निवेश, कवरेज और सुधारों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई

बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई
लोकसभा ने मंगलवार को सबका बीमा सबकी रक्षा विधेयक, 2025 पारित कर दिया, जिससे बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 100 प्रतिशत कर दी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इससे वैश्विक बीमा कंपनियां बिना घरेलू साझेदारों की तलाश के सीधे भारत में पूंजी निवेश कर सकेंगी।
वित्त मंत्री ने बताया कि मौजूदा 74 प्रतिशत एफडीआई सीमा विदेशी कंपनियों के लिए बाधा बन रही थी, क्योंकि शेष हिस्सेदारी के लिए उपयुक्त भारतीय साझेदार खोजना कठिन था। 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति से बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और कंपनियां भारतीय कानूनों के तहत ही काम करेंगी।
सीतारमण ने कहा कि भारत में बीमा कवरेज अभी भी कम है। बीमा पैठ बढ़ाने के लिए सरकार पहले ही व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर 18 प्रतिशत जीएसटी हटा चुकी है। नया विधेयक बीमा कवरेज बढ़ाने, अनुपालन को आसान बनाने और नियामकीय निगरानी को मजबूत करने पर केंद्रित है।
विधेयक की प्रमुख विशेषताओं में पॉलिसीधारकों की शिक्षा और संरक्षण कोष की स्थापना शामिल है, जिससे लोगों में बीमा जागरूकता बढ़ेगी और दावों के निपटारे को सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके अलावा, बीमा कंपनियों के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय निगरानी को सशक्त किया गया है।
बीमा मध्यस्थों के लिए एक बार का पंजीकरण प्रावधान लाया गया है, जिससे सेवाओं में बाधा न आए और नियामकीय देरी कम हो। सरकार का मानना है कि विदेशी निवेश से वैश्विक स्तर की जोखिम मूल्यांकन तकनीकें, बेहतर प्रबंधन और नए बीमा उत्पाद भारत आएंगे।
विधेयक में लाइसेंस रद्द करने के बजाय निलंबन का प्रावधान भी किया गया है, ताकि संबंधित संस्थाएं अपनी कमियों को सुधार सकें। इसके अलावा, बीमा और गैर-बीमा कंपनियों के विलय की अनुमति, गलत लाभ की वसूली, शेयर ट्रांसफर की सीमा बढ़ाना और विदेशी पुनर्बीमा शाखाओं के लिए पूंजी मानक घटाना जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।
नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है, जिससे अनुपालन को सख्ती से लागू किया जा सके। विपक्ष ने विधेयक का विरोध करते हुए विदेशी नियंत्रण पर सवाल उठाए, लेकिन सरकार ने कहा कि यह कदम बीमा क्षेत्र को मजबूत करेगा और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।