इस विधि से करें भरणी श्राद्ध, अवश्य मिलेगा फल
इस समय श्राद्ध का महीना चल रहा है, इसलिए भरणी श्राद्ध पर इस विधि से करें श्राद्ध, अवश्य मि
भरणी श्राद्ध की महिमा
भरणी श्राद्ध की महिमा
।भरणी श्राद्ध मार्गदर्शन।
11/9/2025 गुरुवार , भाद्रपद मास,भरणी श्राद्ध मार्गदर्शन।
शास्त्री जी कमलेशभाई पंड्या द्वारा आज हम भरणी श्राद्ध का मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे
भरणी श्राद्ध (या महाभरणी) पितृ पक्ष का एक विशेष और अत्यंत शुभ दिन है जो भरणी नक्षत्र में पड़ता है।
इस अनुष्ठान का उद्देश्य पितरों की आत्माओं की शांति और कल्याण के लिए किया जाता है
यह माना जाता है कि भरणी नक्षत्र मृत्यु के देवता यम से संबंधित है, और इस नक्षत्र में किया गया श्राद्ध दिवंगत व्यक्तियों को मोक्ष दिलाता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने कभी तीर्थयात्रा नहीं की हो, और उन्हें गया व अन्य पवित्र तीर्थस्थलों के समान पुण्य प्रदान करता है।
भरणी श्राद्ध कब किया जाता है?
यह पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है, जब भरणी नक्षत्र अपराह्न काल में प्रबल होता है।
यह चतुर्थी या पंचमी तिथि को हो सकता है, इसलिए यह किसी एक निश्चित तिथि से नहीं जुड़ा है।
मृत्यु के पहले वर्ष में भरणी श्राद्ध नहीं किया जाता है; इसे वार्षिक श्राद्ध के बाद ही किया जाना चाहिए।
भरणी श्राद्ध क्यों किया जाता है?
पितरों को शांति:
यह दिवंगत पूर्वजों की आत्माओं को शांति और मोक्ष प्रदान करता है।
तीर्थयात्रा के समान पुण्य:
मान्यता है कि इस अनुष्ठान से व्यक्ति को गया, काशी, पुष्कर और बद्री-केदार जैसे पवित्र तीर्थों पर श्राद्ध करने के बराबर फल मिलता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने कभी तीर्थयात्रा नहीं की।
यम का आशीर्वाद:
भरणी नक्षत्र मृत्यु के देवता यम का प्रतीक है, और इस दिन अनुष्ठान करने से पितरों का कल्याण होता है।
वंशजों का कल्याण:
यह वंशजों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाता है।
कैसे किया जाता है?
यह एक पंडित की मदद से किया जाता है, जो श्राद्ध की विधि पूरी करता है।
इस दौरान तर्पण, पिंडदान और मंत्रोच्चारण जैसे विभिन्न कर्मकांड शामिल होते हैं।
विशेष मार्गदर्शन के लिए व्हाट्सएप पर हमारा संपर्क कर सकते हैं।
शास्त्रीजी कमलेशभाई पंड्या
9924233030
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