डिजिटल सिक्योरिटी: आज से 'SIM बाइंडिंग' नियम लागू
करोड़ों WhatsApp और Telegram अकाउंट खतरे में; फ़ोन में एक्टिव SIM कार्ड होना अब ज़रूरी

जानें आज से नियम में क्या बदलेगा

जानें आज से नियम में क्या बदलेगा
भारत सरकार ने डिजिटल सिक्योरिटी और साइबर क्राइम को कंट्रोल करने के लिए एक ऐतिहासिक और बहुत सख्त कदम उठाया है। आज से देश भर के करोड़ों WhatsApp यूज़र्स के लिए नियम पूरी तरह बदल गए हैं। 'SIM बाइंडिंग' नाम के इस नए कानून के लागू होने से, अगर आप सावधान नहीं रहे तो आपका सोशल मीडिया अकाउंट पल भर में बंद हो सकता है।
केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकॉम (DoT) की तरफ़ से जारी एक नए आदेश के मुताबिक, अब WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करने के लिए किसी भी मोबाइल नंबर में एक्टिव SIM कार्ड होना ज़रूरी है। पिछले सिस्टम के मुताबिक, अगर फ़ोन से SIM कार्ड निकाल भी दिया जाए या OTP से लॉग इन करने के बाद SIM बंद भी कर दिया जाए, तो भी WhatsApp Wi-Fi का इस्तेमाल करके चलता रहेगा। लेकिन 1 मार्च से यह सुविधा बंद कर दी गई है।
अब, अगर आपके मोबाइल में SIM कार्ड फिजिकली मौजूद नहीं है या रिचार्ज न होने की वजह से नंबर बंद है, तो आपका WhatsApp अकाउंट भी अपने आप 'इनएक्टिव' हो जाएगा।
यह क्रांतिकारी फैसला क्यों लिया गया?
भारत में अभी लगभग 853 मिलियन WhatsApp यूज़र हैं। इतनी बड़ी संख्या का फायदा उठाकर साइबर क्रिमिनल फेक अकाउंट और डमी SIM कार्ड के ज़रिए लोगों को चूना लगा रहे हैं। सरकार के इस फैसले के पीछे मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
ऑनलाइन फ्रॉड रोकें: साइबर स्कैमर अनजान नंबरों से WhatsApp कॉल करके लोगों को फंसाते हैं। अब SIM बाइंडिंग की वजह से हर अकाउंट एक वेरिफाइड SIM से लिंक होगा, जिससे क्रिमिनल्स को ट्रेस करना आसान हो जाएगा।
डिजिटल अरेस्ट के मामले: पिछले कुछ समय से 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर फ्रॉड में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इस नए नियम से ऐसी फर्जी कॉल्स पर रोक लगेगी।
सिक्योरिटी वेरिफिकेशन: SIM बाइंडिंग रूल UPI ऐप्स (जैसे Google Pay, PhonePe) में पहले से ही सक्सेसफुली काम कर रहा है, इसी मॉडल को अब मैसेजिंग ऐप्स में भी अपनाया गया है।
WhatsApp Web (Desktop) यूज़र्स के लिए नए रूल्स
सिर्फ मोबाइल ही नहीं, बल्कि ऑफिस या घर पर कंप्यूटर/लैपटॉप पर WhatsApp यूज़ करने वालों के लिए भी बड़े बदलाव हुए हैं:
Auto Log-Out: अब WhatsApp Web या Desktop एप्लीकेशन पर हर 6 घंटे में 'Auto Log-Out' होगा। इसका मतलब है कि सिक्योरिटी कारणों से, आपको हर 6 घंटे में फिर से QR कोड स्कैन करके लॉग इन करना होगा।
SIM ट्रांसफर: अगर आप अपना SIM कार्ड एक फोन से दूसरे फोन में डालते हैं, तो पुराने डिवाइस (जिसमें SIM नहीं है) से WhatsApp तुरंत लॉग आउट हो जाएगा।
लागू करने की डेडलाइन
डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने ये गाइडलाइंस 28 नवंबर 2025 को जारी की थीं और सभी टेक कंपनियों को अपने सिस्टम अपडेट करने के लिए 90 दिन का समय दिया था। यह 90 दिन की डेडलाइन 28 फरवरी को खत्म हो गई, जिसके चलते आज से यह कानून पूरे देश में सख्ती से लागू हो गया है।
यूज़र्स को क्या ध्यान रखना चाहिए?
1. पक्का करें कि जिस SIM कार्ड पर आपका WhatsApp है, वह उसी फ़ोन में हो। 2. अपना मोबाइल नंबर हमेशा रिचार्ज रखें, अगर नंबर बंद है, तो सोशल मीडिया अकाउंट भी ब्लॉक हो सकता है। 3. लिंक्ड डिवाइस इस्तेमाल करते समय सावधान रहें, क्योंकि मेन फ़ोन का SIM एक्टिव होना ज़रूरी है।
सरकार का यह फ़ैसला आम नागरिकों की प्राइवेसी और फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए वरदान साबित हो सकता है। शुरू में यह थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन 'SIM बाइंडिंग' भारत को साइबर क्राइम फ़्री बनाने के लिए एक बहुत ज़रूरी कदम है।