राजकोट में 1500 घरों के टूटने की पूरी कहानी
जंगलेश्वर में 1500 घर-दुकानें तोड़ी गईं, JCB-ट्रैक्टरों से चली कार्रवाई, लोग रोते-बिलखते

JCB, ट्रैक्टर, मशीनें और बिलखते लोग

JCB, ट्रैक्टर, मशीनें और बिलखते लोग
राजकोट नगर निगम ने जंगलेश्वर इलाके में आजी नदी के किनारे बसी अवैध बस्तियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ध्वस्तीकरण (मेगा डिमोलिशन) अभियान शुरू किया है। इस अभियान में करीब 1500 घरों, दुकानों और झोपड़ियों को तोड़ा जा रहा है। सोमवार को पहले दिन ही 1119 घर-दुकानें ध्वस्त कर दी गईं, जबकि बाकी मंगलवार को तोड़ी जाएंगी। यह कार्रवाई उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के आदेश पर चल रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य आजी नदी का प्राकृतिक बहाव बहाल करना और शहर में बाढ़ का खतरा कम करना है। साथ ही 15 मीटर चौड़ी नई सड़क बनाने के लिए भी जगह खाली कराई जा रही है।
7 जोन में बांटा गया पूरा इलाका पूरे जंगलेश्वर क्षेत्र को 7 अलग-अलग जोन में बांटा गया है। हर जोन में क्लास-1 अधिकारी, टेक्निकल स्टाफ, सुपरवाइजर और फील्ड कर्मचारी तैनात किए गए हैं। नगर निगम ने अभियान के लिए 260 से ज्यादा मशीनें लगाई हैं, जिसमें 64 JCB, 90 ट्रैक्टर, 7 हिटाची, 50 ब्रेकर, 42 गैस कटर और 14 डम्पर शामिल हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 2500 से ज्यादा पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल तैनात हैं। 25 ड्रोन कैमरे और 30 वॉकी-टॉकी से सतत निगरानी की जा रही है। नगर निगम ने विशेष कंट्रोल रूम बनाया है, जहां से कमिश्नर तुषार सुमेरा पूरी कार्रवाई की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
क्यों हो रही है यह कार्रवाई? यह अभियान आजी नदी के किनारे बसी अवैध बस्तियों को हटाकर नदी का प्राकृतिक बहाव बहाल करने और बाढ़ से बचाव के लिए किया जा रहा है। साथ ही टाउन प्लानिंग रोड (15 मीटर चौड़ी सड़क) बनाने के लिए भी जगह खाली कराई जा रही है। नगर निगम का कहना है कि ये बस्तियां गैरकानूनी हैं और नदी के बहाव में रुकावट पैदा कर रही थीं। अभियान से पहले 1026 घरों के मालिकों ने खुद ही घर खाली कर दिए थे, जबकि बाकी पर मशीनें चला दी गईं।
लोगों का गुस्सा और दर्द जंगलेश्वर में दशकों से रह रहे परिवारों का कहना है कि उन्होंने पूरी जिंदगी की कमाई से ये घर बनाए थे और अब सब कुछ आंखों के सामने बर्बाद हो रहा है। गली नंबर 3 के रहने वाले हारुनभाई सुमरा ने बताया, “हम 43 साल से यहां रह रहे हैं। मैं और मेरी बहन दोनों दिव्यांग हैं। दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। अब घर टूट रहा है तो कहां जाएंगे?” कई महिलाएं रोते-बिलखते नजर आईं। उनका आरोप है कि वैकल्पिक आवास दिए बिना घर तोड़े जा रहे हैं। “हम कहीं के नहीं रहे,” यह उनकी सबसे बड़ी पुकार है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम अभियान के दौरान किसी भी तरह की अफरा-तफरी न हो इसके लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। डीसीपी जोन-1 हेतल पटेल ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी 7 जोन में पर्याप्त पुलिस और अर्धसैनिक बल हैं। सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाई गई है और अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
क्या है आगे का प्लान? नगर निगम का कहना है कि अभियान 2-3 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। सूर्यास्त तक काम चलता है और अगले दिन सुबह फिर शुरू होता है। जितनी जल्दी संभव हो अभियान पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर भी विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है।
यह अभियान राजकोट के इतिहास का सबसे बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान माना जा रहा है, जिससे शहर के विकास के साथ-साथ हजारों परिवारों का उजड़ना भी तय है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई शहर की सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी है, जबकि स्थानीय लोग इसे अपनी जिंदगी पर हमला बता रहे हैं।