24 जुलाई 2025 को लंदन में भारत और ब्रिटेन ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर की उपस्थिति में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उनके ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन रेनॉल्ड्स ने इस समझौते पर दस्तखत किए। यह तीन साल की लंबी वार्ता का परिणाम है, जिसकी शुरुआत जनवरी 2022 में बोरिस जॉनसन के कार्यकाल में हुई थी।
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इस FTA से भारत के 99% निर्यात पर टैरिफ में राहत मिलेगी, जिससे टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों को ब्रिटेन में सस्ता बाजार मिलेगा। सूरत, लुधियाना, और आगरा जैसे औद्योगिक केंद्रों को विशेष लाभ होगा। वहीं, ब्रिटेन के 90% निर्यात पर टैक्स कम होगा, जिससे स्कॉच व्हिस्की, कारें, और चॉकलेट जैसे उत्पाद भारत में सस्ते होंगे। व्हिस्की पर टैरिफ 150% से घटकर 75% होगा और अगले 10 वर्षों में 40% तक आएगा।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
यह समझौता 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 120 अरब डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य रखता है। भारतीय कंपनियों जैसे टाटा मोटर्स, वेलस्पन, और बाटा को ब्रिटेन में विस्तार का मौका मिलेगा, जिससे रोजगार सृजन होगा। सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत भारतीय कामगारों को ब्रिटेन में तीन साल तक सोशल सिक्योरिटी योगदान से छूट मिलेगी, जिससे सालाना ₹4,000 करोड़ की बचत होगी। भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक, और संगीतकारों को अस्थायी वीजा मिलेगा, जिससे सर्विस सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
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सियासी और रणनीतिक महत्व
PM मोदी ने इसे “हाई स्कोरिंग पार्टनरशिप” करार देते हुए क्रिकेट के जिक्र के साथ दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “यह समझौता भारतीय किसानों, युवाओं, और MSMEs के लिए नए अवसर खोलेगा।”
ब्रिटिश PM स्टार्मर ने इसे ब्रिटेन में नौकरियों और विकास के लिए “बड़ी जीत” बताया। यह डील ब्रिटेन की लेबर सरकार और भारत के बीच नई शुरुआत का प्रतीक है, खासकर Brexit के बाद ब्रिटेन की वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए।