पंजाब में पराली फिर सुलगी, दिल्ली की सांस रुकी
बाढ़ से राहत के बाद पंजाब में पराली जलने से दिल्ली की हवा फिर जहरीली

दिल्ली की हवा में घुला पराली धुआं

दिल्ली की हवा में घुला पराली धुआं
दिल्ली की हवा एक बार फिर गंभीर स्तर की ओर बढ़ रही है, क्योंकि पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। राज्य में एक ही दिन में 69 पराली जलाने के मामले दर्ज हुए — जो इस मौसम का सबसे बड़ा आंकड़ा है। अब तक कुल 484 घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। बाढ़ के कारण देरी से हुई कटाई के बाद खेत सूखते ही धुएं के बादल फिर उठने लगे हैं, जो राजधानी की हवा में जहर घोल रहे हैं।
इस महीने की शुरुआत में, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में 77 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई थी। बाढ़ के कारण खेतों में पानी भरा रहने से किसान फसल का अवशेष नहीं जला सके। 1–12 अक्टूबर के बीच दोनों राज्यों में केवल 175 घटनाएं हुईं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 779 थीं। इसके बावजूद, दीवाली के बाद दिल्ली में PM 2.5 स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया, जो दर्शाता है कि केवल पराली पर नियंत्रण से दिल्ली की हवा साफ नहीं हो सकती।
अब जब उत्तर-पश्चिमी हवाएं पंजाब की दिशा से चल रही हैं, तो पराली का धुआं दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच रहा है, जिससे स्थानीय प्रदूषण और बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI “बहुत खराब” से “गंभीर” स्तर तक जा सकता है।
तरण तारण और फिरोजपुर जिले पराली जलाने के नए हॉटस्पॉट बन गए हैं, जहां क्रमशः 18 और 14 नए मामले दर्ज हुए। हालांकि कुल आंकड़ों में अब तक पिछले साल की तुलना में 70 प्रतिशत कमी है, लेकिन मौजूदा बढ़ोतरी चिंता का विषय है क्योंकि पराली जलाने का चरम सीजन अभी बाकी है।
पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट और CAQM के निर्देशों के तहत सख्ती बढ़ाई है। अब तक 172 FIR दर्ज, 189 जुर्माने लगाए गए हैं और 165 किसानों की भूमि रिकॉर्ड में लाल प्रविष्टियां की गई हैं। इसके अलावा, हर थाने स्तर पर ‘पराली प्रोटेक्शन फोर्स’ बनाई गई है, जो पराली जलाने पर निगरानी और किसानों को जागरूक करने का काम कर रही है।
फिर भी, विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए स्थायी और लाभदायक विकल्प नहीं मिलते, तब तक सख्त कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। हर साल सर्दियों में दिल्ली की हवा को पराली का धुआं दमघोंटू बना देता है।