दिल्ली घुटी धुएं में: प्रदूषण और विरोध
घना स्मॉग छाया, लोग सड़कों पर उतरे; सरकारों में आरोप-प्रत्यारोप तेज़

दिल्ली प्रदूषण

दिल्ली प्रदूषण
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली फिर से जहरीली हवा की चपेट में है। सोमवार सुबह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 372 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
गुरुग्राम (328), ग्रेटर नोएडा (325), गाज़ियाबाद (318), फरीदाबाद (312) और नोएडा (310) जैसे एनसीआर के शहरों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे स्तर पर लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस और हृदय संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।
कम हवा की गति, गिरते तापमान और पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं ने प्रदूषण को और बढ़ा दिया है। निर्माण कार्यों पर रोक, वाहनों पर प्रतिबंध और एंटी-स्मॉग गन जैसी कोशिशों के बावजूद हवा की स्थिति नहीं सुधरी है।
इसी बीच रविवार शाम सैकड़ों लोग गैस मास्क पहनकर और बच्चों को साथ लेकर इंडिया गेट पहुंचे, जहां उन्होंने स्वच्छ हवा की मांग की। बिना अनुमति हुए इस प्रदर्शन में करीब 80 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें कई पर्यावरण कार्यकर्ता और अभिभावक शामिल थे।
सोशल मीडिया पर फैले वीडियो में पुलिस द्वारा लोगों को हिरासत में लेते हुए देखा गया, जिससे व्यापक नाराज़गी फैली। प्रदर्शन में शामिल पर्यावरणविद भवरीन कंधारी ने कहा कि अभिभावक जवाबदेही चाहते हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं दिख रहे।
विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि स्वच्छ हवा नागरिकों का बुनियादी अधिकार है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को अपराधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने कहा कि मौजूदा सरकार स्थिति सुधारने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन पिछले कई वर्षों की गड़बड़ियों को सात महीनों में ठीक करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि ई-बसेस, एंटी-स्मॉग गन और डस्ट कंट्रोल सिस्टम जैसी पहलें लागू की जा रही हैं।
आप के दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने सरकार पर आंकड़ों में हेराफेरी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन पर जनता का भरोसा घटता जा रहा है।
लगातार कई हफ्तों से दिल्ली की हवा ‘खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी हुई है। नागरिकों का कहना है कि वे अब अस्थायी उपायों से नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की उम्मीद करते हैं।