नई दिल्ली: Union Finance Minister Nirmala Sitharaman ने इंडियन टैक्स रिसर्च एंड एडवाइजरी फाउंडेशन (ITRAF) से अपनी इंटरनेशनल टैक्सेशन रिसर्च, टैक्स एनालिसिस और विशेषज्ञ जानकारी को व्यापक स्तर पर सामने लाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ITRAF का रिसर्च वर्क केवल टैक्स प्रोफेशनल्स और एक्सपर्ट्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका फायदा पॉलिसी मेकर्स और आम जनता तक भी पहुंचना चाहिए। निर्मला सीतारमण ने यह बात बेंगलुरु, कर्नाटक में आयोजित ITRAF के 8वें इंटरनेशनल टैक्स कॉन्फ्रेंस में कही। उनके संदेश का मुख्य फोकस इंटरनेशनल टैक्सेशन, टैक्स रिसर्च, टैक्स पॉलिसी और पॉलिसी मेकिंग पर रहा।
निर्मला सीतारमण ने ITRAF से क्या कहा?
वित्त मंत्री ने ITRAF से कहा कि संस्था ने पिछले वर्षों में इंटरनेशनल टैक्सेशन के क्षेत्र में लगातार रिसर्च और एनालिसिस किया है, लेकिन अब इस विशेषज्ञता को और ज्यादा व्यापक मंच पर लाने की जरूरत है।
उन्होंने ITRAF से अपनी टैक्स रिसर्च और इंटरनेशनल टैक्स एनालिसिस को खुलकर सामने रखने का आग्रह किया, ताकि इसका इस्तेमाल केवल टैक्स एक्सपर्ट्स के बीच ही नहीं, बल्कि टैक्स पॉलिसी और नीति निर्माण से जुड़ी चर्चाओं में भी हो सके। निर्मला सीतारमण का जोर इस बात पर था कि ITRAF की विशेषज्ञ जानकारी को व्यापक सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाया जाए।
ITRAF की इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च क्यों है महत्वपूर्ण?
इंटरनेशनल टैक्सेशन का संबंध वैश्विक कारोबार, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, टैक्स नियमों, टैक्स पॉलिसी और सीमा पार होने वाले आर्थिक लेनदेन से है। इसलिए इस क्षेत्र में होने वाली रिसर्च का महत्व केवल टैक्स प्रोफेशनल्स तक सीमित नहीं है। वित्त मंत्री ने कहा कि ITRAF की स्टडी, रिसर्च पेपर और एनालिसिस को टैक्स पॉलिसी तथा इंटरनेशनल टैक्स पॉलिसी से जुड़ी चर्चाओं में ज्यादा प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि संस्था की विशेषज्ञ जानकारी पॉलिसी मेकर्स, टैक्स एक्सपर्ट्स और आम जनता तक ज्यादा व्यापक तरीके से पहुंचे।
ITRAF में कौन-कौन से टैक्स एक्सपर्ट शामिल हैं?
निर्मला सीतारमण ने ITRAF की विशेषज्ञ टीम का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, संस्था में बड़ी भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों के पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर्स (CFOs) और टैक्स हेड्स के साथ-साथ वरिष्ठ वकील, प्रमुख प्रोफेशनल फर्मों के पार्टनर्स और टैक्सेशन क्षेत्र से जुड़े एकेडेमिक्स शामिल हैं। ये विशेषज्ञ लंबे समय से इंटरनेशनल टैक्सेशन, टैक्स रिसर्च और टैक्स पॉलिसी से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने इसी विशेषज्ञता को ज्यादा व्यापक नीति चर्चा तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया।
ITRAF ने अब तक इंटरनेशनल टैक्सेशन पर क्या काम किया?
निर्मला सीतारमण ने ITRAF के रिसर्च वर्क और प्रकाशनों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, संस्था अब तक सात वॉल्यूम प्रकाशित कर चुकी है। इन प्रकाशनों की प्रस्तावना इंटरनेशनल टैक्सेशन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित विशेषज्ञों ने लिखी है। ITRAF ने अपनी गतिविधियों का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी किया है। वित्त मंत्री के अनुसार, संस्था ने द हेग, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) और लंदन स्थित चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्सेशन जैसे संस्थानों के साथ मिलकर इंटरनेशनल टैक्स कॉन्फ्रेंस आयोजित किए हैं।
ITRAF की रिसर्च को पॉलिसी मेकिंग से जोड़ने पर जोर
निर्मला सीतारमण के संदेश का एक अहम हिस्सा पॉलिसी मेकिंग में टैक्स रिसर्च की भूमिका से जुड़ा रहा। उनका कहना था कि इंटरनेशनल टैक्सेशन पर तैयार की गई विशेषज्ञ रिसर्च केवल पेशेवर चर्चाओं तक सीमित न रहे। इसे टैक्स पॉलिसी, इंटरनेशनल टैक्स पॉलिसी और नीति निर्माण से जुड़ी चर्चाओं में भी अधिक प्रभावी जगह मिलनी चाहिए। इससे टैक्स से जुड़े जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बेहतर जानकारी और व्यापक चर्चा को बढ़ावा मिल सकता है।
आम जनता तक भी पहुंचे इंटरनेशनल टैक्स की जानकारी
वित्त मंत्री ने ITRAF की रिसर्च को आम जनता तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। इंटरनेशनल टैक्सेशन जैसे तकनीकी विषय आम लोगों के लिए जटिल हो सकते हैं, लेकिन टैक्स नियमों और नीतियों का असर व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा होता है। ऐसे में ITRAF की रिसर्च और एनालिसिस को सरल और व्यापक तरीके से सामने लाने से टैक्स पॉलिसी और इंटरनेशनल टैक्सेशन से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक समझ बढ़ सकती है।
निर्मला सीतारमण के बयान की बड़ी बात क्या है?
निर्मला सीतारमण का संदेश साफ तौर पर ITRAF की टैक्स रिसर्च और विशेषज्ञता का दायरा बढ़ाने से जुड़ा है। वित्त मंत्री ने संस्था से कहा कि वह इंटरनेशनल टैक्सेशन पर वर्षों से किए जा रहे अपने काम को केवल विशेषज्ञों तक सीमित न रखे। इसकी रिसर्च, एनालिसिस और टैक्स विशेषज्ञता को पॉलिसी मेकर्स और आम जनता तक भी पहुंचाया जाए। यानी ITRAF के लिए फोकस अब केवल रिसर्च करने तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च को व्यापक नीति और सार्वजनिक चर्चा तक पहुंचाने पर भी है।