नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में लगातार छठे दिन गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को WTI Crude Oil Price $90 प्रति बैरल से नीचे आ गया। अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुई बातचीत से मिडिल ईस्ट में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हुई है। इस गिरावट का असर भारत के कमोडिटी बाजार पर भी दिखाई दिया। MCX पर कच्चे तेल की कीमत 1.28% गिरकर ₹8,532 प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं Brent Crude और Murban Crude की कीमतों में भी कमजोरी दर्ज की गई। कुछ दिन पहले MCX पर कच्चे तेल की कीमत ₹10,000 प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट ने क्रूड ऑयल मार्केट की दिशा को लेकर बाजार में नई चर्चा शुरू कर दी है।
US-ईरान बातचीत से क्यों गिरा कच्चे तेल का भाव?
कच्चे तेल की कीमत में आई गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुई बातचीत एक अहम वजह है। मिडिल ईस्ट में तनाव और तेल सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने से बाजार को उम्मीद है कि आने वाले समय में सप्लाई से जुड़ी बाधाएं कम हो सकती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक काफी फायदेमंद रही। उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की संभावना के साथ दूसरे विकल्पों पर भी विचार किए जाने की बात कही। अगर अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते के बाद ईरानी तेल के निर्यात पर लगी बाधाएं कम होती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ सकती है। सप्लाई बढ़ने की संभावना से क्रूड ऑयल की कीमत पर दबाव बना रह सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का बड़ा संकेत
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) इस समय ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। ईरान के एक अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिका ईरानी तेल के निर्यात में बाधा डालने वाली नाकाबंदी हटाने की दिशा में कदम उठाता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है। इसलिए इस रूट के सामान्य रूप से खुलने या बंद रहने का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत और ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर पड़ सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की फारस की खाड़ी के नेताओं से मुलाकात
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सप्ताह के अंत में फारस की खाड़ी क्षेत्र के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। मिडिल ईस्ट में जारी घटनाक्रम के बीच बाजार की नजर इन बैठकों पर भी रहेगी। खास तौर पर तेल सप्लाई, एनर्जी सिक्योरिटी और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे।
सऊदी अरब का वैकल्पिक तेल सप्लाई प्लान
इसी बीच सऊदी अरब अपनी East-West Pipeline के जरिए कच्चे तेल का निर्यात फिर शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। इस पाइपलाइन की खासियत यह है कि इसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हुए बिना कच्चे तेल का निर्यात किया जा सकता है। मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच वैकल्पिक निर्यात मार्ग ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए अहम भूमिका निभा सकता है।
WTI Crude Oil Price: $89.38 प्रति बैरल
Oilprice.com के डेटा के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 9:40 बजे WTI Crude Oil $89.38 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इसमें 1.26% की गिरावट दर्ज की गई।
प्रमुख क्रूड ऑयल बेंचमार्क की कीमतें इस तरह रहीं:
- WTI Crude: $89.38 प्रति बैरल, 1.26% गिरावट
- Brent Crude: $98.49 प्रति बैरल, 0.77% गिरावट
- Murban Crude: $108.67 प्रति बैरल, 1.23% गिरावट
इस तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में लगातार छठे ट्रेडिंग सेशन में कमजोरी दर्ज हुई।
MCX Crude Oil Price: ₹8,532 प्रति बैरल
भारत में MCX Crude Oil Price में भी गिरावट दर्ज की गई। बुधवार सुबह करीब 9:40 बजे 19 अक्टूबर डिलीवरी वाला MCX Crude Oil कॉन्ट्रैक्ट 1.28% गिरकर ₹8,532 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले MCX पर कच्चे तेल की कीमत ₹10,000 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई थी। इसके बाद बाजार में आई नरमी से MCX क्रूड की कीमत में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
भारत में पेट्रोल-डीजल पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil Price में बदलाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू ईंधन बाजार पर पड़ सकता है।
अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक कम रहती है, तो इसका असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है:
- पेट्रोल और डीजल की लागत
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स खर्च
- भारत का कच्चा तेल आयात बिल
- महंगाई का दबाव
- ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की लागत
- उद्योगों की ईंधन लागत
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता होने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत तुरंत कम हो जाएगी। घरेलू ईंधन की कीमत पर कच्चे तेल के अलावा टैक्स, रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति, रिफाइनिंग लागत और अन्य बाजार कारकों का भी असर होता है।
आगे कच्चे तेल की कीमत किस दिशा में जाएगी?
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत की दिशा तय करने वाले कई अहम कारक होंगे। इनमें अमेरिका-ईरान बातचीत, ईरानी तेल निर्यात, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और मिडिल ईस्ट से ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रमुख हैं।
अगर ईरान से तेल निर्यात की बाधाएं कम होती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य का शिपिंग रूट सामान्य रूप से काम करता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई बढ़ सकती है।
इसके उलट, अगर अमेरिका-ईरान बातचीत में रुकावट आती है या मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई में नई समस्या पैदा होती है, तो क्रूड ऑयल मार्केट में फिर से तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल WTI Crude Oil का $90 से नीचे आना और MCX Crude Oil का ₹8,532 प्रति बैरल तक गिरना अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कमोडिटी बाजार में आई हालिया नरमी के प्रमुख संकेत हैं। अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े अगले घटनाक्रम पर रहेगी।