चुनावी घोषणापत्र क्या है? कैसे तैयार होता है
सुप्रीम कोर्ट-चुनाव आयोग की गाइडलाइंस

चुनावी घोषणापत्र क्या है

चुनावी घोषणापत्र क्या है
चुनावी घोषणापत्र (Election Manifesto) राजनीतिक दलों का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो चुनाव से पहले जारी किया जाता है। यह दल की नीतियों, वादों और भविष्य की योजनाओं का सार्वजनिक घोषणा-पत्र होता है, जिसमें बताया जाता है कि सत्ता में आने पर दल जनता के हित में क्या-क्या कदम उठाएगा। यह दल का 'विजन डॉक्यूमेंट' है, जो मतदाताओं को आकर्षित करने और विश्वास जीतने का माध्यम है। भारत में 1952 के पहले आम चुनाव से यह परंपरा चली आ रही है, और दुनिया में 19वीं सदी से ब्रिटेन-अमेरिका में प्रचलित है। बिहार चुनाव 2025 में NDA ने 'संकल्प पत्र' और महागठबंधन ने 'तेजस्वी प्रण पत्र' जारी किया, जो घोषणापत्र के ही रूप हैं।
![CHUNAV-01[1].jpg](https://ibp-benefits.s3.ap-south-1.amazonaws.com/prod/news/uploads/images/1761909880125_CHUNAV-01%255B1%255D.jpg.jpg)
राजनीतिक दल घोषणापत्र तैयार करने के लिए एक विशेष टीम गठित करते हैं, जिसमें वरिष्ठ नेता, विशेषज्ञ, कार्यकर्ता और रिसर्चर शामिल होते हैं। प्रक्रिया इस प्रकार है:
सुप्रीम कोर्ट ने 5 जुलाई 2013 को एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु सरकार केस में चुनाव आयोग को निर्देश दिया:
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आयोग ने दलों से चर्चा कर आदर्श आचार संहिता (MCC) में शामिल किया। मुख्य बिंदु:
निष्कर्ष: घोषणापत्र लोकतंत्र में जनता का विजन डॉक्यूमेंट है। सुप्रीम कोर्ट-आयोग की गाइडलाइंस पार्टियां बंधी हैं। जनता असंभव वादों से सावधान रहे – व्यावहारिक रोडमैप वाले ही विश्वसनीय। वोटर ही फैसला करेगा।
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