स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली: India beat West Indies के खिलाफ 405 रन के विशाल लक्ष्य का सफल पीछा करते हुए शानदार जीत दर्ज की। टीम इंडिया ने यह बड़ा लक्ष्य सिर्फ 43.3 ओवर में हासिल किया। इस यादगार रन-चेज में भारतीय कप्तान शुभमन गिल के दोहरे शतक और रोहित शर्मा के शतक ने अहम भूमिका निभाई। इस मुकाबले की सबसे खास बात यह रही कि शुभमन गिल क्रैम्प्स यानी मांसपेशियों में खिंचाव की परेशानी के बावजूद लगातार बल्लेबाजी करते रहे। मैच के बाद गिल ने बताया कि भारत ने 405 रन के लक्ष्य का पीछा करने के लिए क्या रणनीति बनाई थी और कैसे टीम ने दबाव को वेस्टइंडीज पर वापस डाल दिया।
वेस्टइंडीज ने भारत को दिया 405 रन का टारगेट
पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ने भारत के सामने 405 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। 400 से ज्यादा रन का लक्ष्य किसी भी टीम के लिए बड़ी चुनौती होता है। इतने बड़े लक्ष्य के बावजूद टीम इंडिया ने शुरुआत से ही सकारात्मक और आक्रामक बल्लेबाजी की। भारतीय बल्लेबाजों ने विकेट बचाते हुए रन गति को तेज रखा और धीरे-धीरे मैच का दबाव वेस्टइंडीज पर बढ़ा दिया।
क्रैम्प्स के बावजूद डटे रहे शुभमन गिल
शुभमन गिल ने मैच के बाद अपनी पारी के दौरान आई मुश्किलों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी करते समय उनके पूरे शरीर में क्रैम्प्स हो रहे थे। दोपहर की गर्मी ने भी उनकी परेशानी बढ़ाई। गिल के मुताबिक, वेस्टइंडीज की लंबी बल्लेबाजी के बाद सिर्फ 13 ओवर फील्डिंग करने पर ही ऐसा महसूस हो रहा था जैसे टीम काफी देर से मैदान पर हो। इसके बावजूद गिल ने अपनी बल्लेबाजी जारी रखी और दोहरा शतक पूरा किया। उन्होंने कहा कि 400 रन का पीछा करना कभी आसान नहीं होता, चाहे पिच कितनी भी अच्छी हो या मैदान की बाउंड्री कितनी भी छोटी क्यों न हो।
405 रन की चेज के लिए क्या थी भारत की रणनीति?
गिल ने बताया कि भारत ने पूरे 405 रन के लक्ष्य को एक साथ हासिल करने के बजाय इसे छोटे-छोटे लक्ष्य में बांटकर आगे बढ़ने की रणनीति बनाई थी। सबसे पहला लक्ष्य था पावरप्ले में बिना विकेट गंवाए 75 से 80 रन बनाना। भारतीय टीम ने इस योजना को सफलतापूर्वक लागू किया और शुरुआत में ही रन-चेज को मजबूत आधार मिल गया। इसके बाद टीम इंडिया का लक्ष्य 25 ओवर तक 200 से 210 रन तक पहुंचने का था। लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने इससे भी तेज बल्लेबाजी की और उस समय तक स्कोर करीब 230 से 240 रन तक पहुंच चुका था। यहीं से 405 रन की चेज भारत के पक्ष में तेजी से जाती दिखी।
पुरानी गेंद और छोटी बाउंड्री का बनाया प्लान
गिल ने बताया कि गेंद पुरानी होने के साथ बल्लेबाजी आसान होती गई। इसके अलावा उनकी तरफ की बाउंड्री भी छोटी थी। भारतीय टीम ने इस परिस्थिति का फायदा उठाते हुए तेज गेंदबाजों के खिलाफ छोटी बाउंड्री की दिशा को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई। इससे रन गति बनाए रखने में मदद मिली और बड़े लक्ष्य का दबाव लगातार कम होता गया।
विकेट बचाना बना भारत की रन-चेज का अहम हिस्सा
405 रन के लक्ष्य का पीछा करते समय भारत का एक बड़ा फोकस जल्दी विकेट नहीं गंवाने पर था। टीम ने अनावश्यक जोखिम से बचते हुए लगातार रन बनाए। पावरप्ले के बाद भारत की स्थिति और मजबूत होती गई। जैसे-जैसे भारतीय स्कोर बढ़ा, वेस्टइंडीज पर दबाव बढ़ता गया। गिल के मुताबिक, पावरप्ले के बाद भारत पर ज्यादा दबाव नहीं था, बल्कि दबाव वेस्टइंडीज की टीम पर चला गया था।
शुभमन गिल के दोहरे शतक से भारत ने रचा यादगार रन-चेज
शुभमन गिल का दोहरा शतक और रोहित शर्मा का शतक भारत की 405 रन की सफल रन-चेज के सबसे बड़े आकर्षण रहे। टीम इंडिया ने महज 43.3 ओवर में 405 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत की इस रन-चेज में सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि पावरप्ले में मजबूत शुरुआत, विकेट बचाना, पुरानी गेंद का फायदा उठाना और लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटना अहम रहा। शुभमन गिल ने मैच के बाद साफ किया कि 400 से ज्यादा रन का लक्ष्य आसान नहीं था, लेकिन टीम ने अपनी रणनीति पर भरोसा रखा और उसे मैदान पर प्रभावी तरीके से लागू किया।