21 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर दिए गए इस इस्तीफे ने कई सवाल खड़े किए। जैसे क्या यह इस्तीफा वास्तव में स्वास्थ्य कारणों से था, या इसके पीछे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और NDA की रणनीति थी?
संविधान के
अनुच्छेद 68 के तहत, 19 सितंबर 2025 तक नया उपराष्ट्रपति चुनना अनिवार्य है। वहीं इस रेस में हरिवंश नारायण सिंह, राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान, रविशंकर प्रसाद और नीतीश कुमार प्रमुख दावेदार हो सकते हैं।
चलिए जानते हैं की क्यों ये सभी उपराष्ट्रपति के टॉप कैंडिडेट्स हैं......?
1) हरिवंश नारायण सिंह: NDA का रणनीतिक दांव
राज्यसभा के उपसभापति और जदयू सांसद
हरिवंश नारायण सिंह (69) इस दौड़ में सबसे आगे हैं। बिहार से होने, पत्रकारिता का लंबा अनुभव, और नीतीश कुमार व PM मोदी के साथ करीबी रिश्ते उनकी दावेदारी को मजबूत करते हैं। उनकी तटस्थ छवि और राज्यसभा संचालन की विशेषज्ञता उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त बनाती है। बिहार चुनाव से पहले उनकी नियुक्ति NDA को जदयू के साथ गठबंधन को और मजबूत करने का मौका दे सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि BJP हरिवंश को प्रोमोट कर गठबंधन धर्म निभाने का संदेश दे सकती है।

2)
राजनाथ सिंह: सभी दलों में स्वीकार्य चेहरा
वरिष्ठ BJP नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (74) की स्वच्छ छवि और सभी दलों में स्वीकार्यता उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। RSS का समर्थन और उत्तर प्रदेश के पूर्व CM व केंद्रीय मंत्री के रूप में उनका अनुभव उनकी योग्यता को रेखांकित करता है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि BJP उन्हें पहले उपराष्ट्रपति और बाद में 2027 में राष्ट्रपति पद के लिए तैयार कर सकती है, जिससे उनका 10 साल तक संवैधानिक पद पर बने रहना तय हो सकता है।

3)
शिवराज सिंह चौहान: OBC और हिंदी बेल्ट का दम
पूर्व मध्य प्रदेश CM शिवराज सिंह चौहान (66) की OBC पृष्ठभूमि और हिंदी बेल्ट में लोकप्रियता उनकी दावेदारी को मजबूती देती है। RSS के समर्पित कार्यकर्ता और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके अनुभव को देखते हुए, उनकी नियुक्ति सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित कर सकती है। पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, "शिवराज की संतुलित छवि और वक्तृत्व कला उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाती है।"

4)
रविशंकर प्रसाद: कानूनी पकड़ और अनुभव
BJP के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद (71) का कानूनी ज्ञान और विपक्षी दलों से अच्छे संबंध उन्हें इस रेस में शामिल करते हैं। बिहार से 19 साल के संसदीय अनुभव और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी भूमिका उनकी योग्यता को दर्शाती है। हालांकि, हाल के वर्षों में मंत्रिमंडल में उनकी अनुपस्थिति उनकी संभावनाओं को कमजोर कर सकती है।

5)
नीतीश कुमार: बिहार की सियासत में कमजोर दावेदारी
बिहार CM नीतीश कुमार (74) का नाम भी चर्चा में है, लेकिन उनकी उम्र, स्वास्थ्य, और बिहार में सक्रिय राजनीति उनकी संभावना को कम करती है। BJP बिहार में नया CM लाना चाहती है, जिसके लिए नीतीश को उपराष्ट्रपति पद ऑफर किया जा सकता है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश इस पद को स्वीकार नहीं करेंगे।