राजनयिकों को बांग्लादेश से वापस बुलाएगा भारत
सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए भारत ने राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने का निर्णय लिया

भारत-बांग्लादेश

भारत-बांग्लादेश
भारत सरकार ने बांग्लादेश में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालातों और कट्टरपंथी तत्वों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली ने बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग और अन्य राजनयिक केंद्रों में तैनात अधिकारियों के परिवारों और आश्रितों को तुरंत भारत वापस लौटने की सलाह दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह एक एहतियाती कदम है और ढाका स्थित उच्चायोग के साथ-साथ चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट के सभी राजनयिक केंद्र पूरी तरह से चालू रहेंगे। सुरक्षा की दृष्टि से अब बांग्लादेश को 'नॉन-फैमिली' पोस्टिंग की श्रेणी में रखा गया है, जो आमतौर पर केवल अत्यधिक अस्थिर या खतरनाक माने जाने वाले देशों के लिए लागू की जाती है।
भारतीय अधिकारियों के परिवार पर भी सुरक्षा का संकट
भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में यह तनाव 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से लगातार बढ़ रहा है। हाल के महीनों में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है, विशेष रूप से 12 दिसंबर को छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद से विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बार-बार इन हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और बांग्लादेशी अधिकारियों से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने का आग्रह किया है। भारत का मानना है कि बांग्लादेश में चरमपंथी समूहों को मिल रही छूट के कारण वहां रह रहे भारतीय अधिकारियों के परिवारों पर भी सुरक्षा का संकट मंडरा रहा है, जिसके कारण यह सुरक्षा वर्गीकरण अब पाकिस्तान से भी अधिक सख्त कर दिया गया है।
ये भी पढें: राजनीतिक अशांति के बीच भारत-बांग्लादेश व्यापार को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है
अपने कर्मियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहि
राजनयिक सूत्रों का कहना है कि चटगांव में भारतीय मिशन के बाहर हुए हिंसक प्रदर्शनों और चरमपंथी तत्वों द्वारा दी जा रही धमकियों ने इस निर्णय को अपरिहार्य बना दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रेखांकित किया कि अल्पसंख्यकों के घरों और व्यवसायों पर होने वाले हमलों को 'निजी दुश्मनी' या 'राजनीतिक मतभेद' बताकर टालने की प्रवृत्ति अपराधियों के हौसले बुलंद कर रही है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि परिवारों की वापसी की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने कर्मियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। वर्तमान स्थिति को देखते हुए आगामी चुनाव तक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया जा सकता है, जबकि भारतीय मिशन अपनी पूर्ण क्षमता के साथ काम करना जारी रखेंगे।