दिग्गज अभिनेत्री संध्या शांताराम का निधन
सिनेमा जगत में शोक की लहर

संध्या शांताराम का निधन

संध्या शांताराम का निधन
भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग की दिग्गज अभिनेत्री संध्या शांताराम का आज 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता वी. शांताराम की पत्नी रहीं संध्या को हिंदी और मराठी सिनेमा में उनके अभिनय और नृत्य कला के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनका अंतिम संस्कार आज ही शिवाजी पार्क स्थित वैकुंठ धाम श्मशान घाट पर संपन्न हुआ, जहां परिवार, फिल्मी हस्तियां और प्रशंसक उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। हालांकि निधन के सटीक कारण का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन स्रोतों के अनुसार वे लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं।
'पिंजरा' में अमर भूमिका: मराठी सिनेमा की धरोहरसंध्या शांताराम का जन्म 13 सितंबर 1938 को विजया देशमुख के रूप में हुआ था। 1951 में वी. शांताराम द्वारा खोजी गईं उन्होंने मराठी फिल्म 'अमर भूपाली' से डेब्यू किया। लेकिन उनकी सबसे यादगार भूमिका 1972 की मराठी क्लासिक 'पिंजरा' में आई, जहां उन्होंने नायिका का किरदार निभाया। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर मराठी अवॉर्ड मिला, और उनकी संवेदनशील अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया। 'पिंजरा' को मराठी सिनेमा की अमर कृति माना जाता है, और संध्या की परफॉर्मेंस आज भी प्रासंगिक है।
हिंदी सिनेमा में नृत्य और अभिनय का जलवा: 'दो आंखें बारह हाथ' और 'नवरंग'हिंदी सिनेमा में संध्या ने अपने पति-निर्देशक वी. शांताराम की फिल्मों में चमक दिखाई। 1955 की 'झनक झनक पायल बाजे' में उन्होंने शास्त्रीय नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जो फिल्म को चार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स दिलाने वाली थी। 1957 की 'दो आंखें बारह हाथ' में उनके अभिनय ने सामाजिक संदेश को जीवंत किया। वहीं, 1959 की 'नवरंग' का गाना 'अरे जा रे हट नटखट' आज भी कल्ट क्लासिक है, जिसमें उन्होंने हाथी के साथ नृत्य किया—बिना किसी स्टंट डबल के। इस गाने के लिए उन्होंने विशेष रूप से शास्त्रीय नृत्य सीखा था। संध्या ने 'तीन बत्ती चार रास्ता' (1953) और 'स्त्री' (1961) जैसी फिल्मों में भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई, जहां असली शेरों के साथ सीन शूट किए गए।
कई भाषाओं में योगदान: पारंपरिक और आधुनिक सिनेमा का पुलसंध्या ने हिंदी, मराठी और अन्य भाषाओं में 50 से अधिक फिल्मों में काम किया। वे पारंपरिक भारतीय संस्कृति को आधुनिक सिनेमा से जोड़ने वाली अभिनेत्री थीं। 2009 में 'नवरंग' की 50वीं वर्षगांठ पर वी. शांताराम अवॉर्ड्स में उनकी विशेष उपस्थिति अंतिम प्रमुख सार्वजनिक कार्यक्रम था। वी. शांताराम (1901-1990) की तीसरी पत्नी रहीं संध्या उनकी प्रेरणा स्रोत भी थीं। उनके दो बच्चे हैं—प्रभात कुमार और मधुरा पंडित।
अंतिम संस्कार में सितारों का सैलाब: श्रद्धांजलि की बाढ़शिवाजी पार्क वैकुंठ धाम में उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किया गया। परिवार के अलावा फिल्मी जगत के कई दिग्गज पहुंचे। बॉलीवुड डायरेक्टर मधुर भंडारकर ने X पर लिखा, "संदीप शांताराम जी के निधन से दुखी हूं। 'पिंजरा', 'दो आंखें बारह हाथ', 'नवरंग' और 'झनक झनक पायल बाजे' जैसी फिल्मों में उनकी आइकॉनिक भूमिकाएं हमेशा याद रहेंगी।" बीजेपी नेता आशीष शेलार ने मराठी में श्रद्धांजलि दी, "पिंजरा की प्रसिद्ध अभिनेत्री संध्या शांताराम जी के निधन की खबर हृदय विदारक है।" सोशल मीडिया पर #SandhyaShantaram और #RIPSandhya ट्रेंड कर रहा है, जहां प्रशंसक उनके गानों को शेयर कर रहे हैं।
भारतीय सिनेमा को अलविदा: एक युग का अंतसंध्या शांताराम का निधन भारतीय सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति है। वे न केवल एक अभिनेत्री थीं, बल्कि नृत्यांगना और सांस्कृतिक पुल भी। उनकी फिल्में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। ओम शांति।
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