Bollywood Music News: हिंदी फिल्मों में गानों की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है। एक समय फिल्मों में 10 से 14 गाने होना आम बात थी, लेकिन अब कई फिल्मों में गिने-चुने गाने ही देखने को मिलते हैं। आखिर बॉलीवुड फिल्मों में गाने क्यों कम हो रहे हैं? सिंगर और म्यूजिक कंपोजर हिमेश रेशमिया ने इस बदलते फिल्म म्यूजिक ट्रेंड की वजह बताते हुए म्यूजिक बजट, गानों की शूटिंग, प्रमोशन, बढ़ते कॉम्पिटिशन और बदलते म्यूजिक मार्केट पर बात की है।
सूरज बड़जात्या की आगामी फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ के सॉन्ग लॉन्च इवेंट में हिमेश रेशमिया ने फिल्मों में गानों की घटती संख्या का उदाहरण देते हुए बताया कि ‘मैंने प्यार किया’ में 14 गाने, ‘प्रेम रतन धन पायो’ में 10 गाने, जबकि ‘ये प्रेम मोल लिया’ में सिर्फ 6 गाने हैं।
14 गानों से 6 गानों तक कैसे बदला बॉलीवुड म्यूजिक?
हिमेश रेशमिया ने सूरज बड़जात्या की फिल्मों का उदाहरण देकर बताया कि फिल्मों में गानों की संख्या का गणित बदल चुका है। ‘मैंने प्यार किया’ में 14 गाने थे। इसके बाद ‘प्रेम रतन धन पायो’ में 10 गाने रहे। अब ‘ये प्रेम मोल लिया’ में यह संख्या घटकर 6 गानों तक पहुंच गई है। यह बदलाव सिर्फ गानों की संख्या तक सीमित नहीं है। हिमेश के मुताबिक, आज फिल्म मेकर्स को गाने बनाने की लागत, शूटिंग का खर्च, प्रमोशन और गाने के संभावित प्रदर्शन को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
हिमेश रेशमिया ने बताया फिल्मों में गाने कम होने का कारण
हिमेश के मुताबिक, पहले फिल्म म्यूजिक को लेकर निर्माताओं के पास अलग तरह की प्लानिंग और बजट होता था। अब गानों की शूटिंग और प्रमोशन पर होने वाला खर्च भी फिल्म की पूरी योजना का हिस्सा बन गया है।
उन्होंने बताया कि आज निर्माता और निर्देशक यह भी देखते हैं कि दो गानों को शूट करने में कितना समय और पैसा लगेगा। यानी फिल्म में गाने रखने का फैसला अब सिर्फ क्रिएटिविटी से नहीं, बल्कि प्रोडक्शन और बिजनेस के हिसाब से भी जुड़ गया है।
Gen Z को भी याद आता है पुराना बॉलीवुड म्यूजिक
हिमेश रेशमिया ने मौजूदा दौर के म्यूजिक ट्रेंड की तुलना पुराने हिंदी फिल्म संगीत से करते हुए कहा कि Gen Z के युवा भी पुराने गानों को याद करते हैं। उनके मुताबिक, उनके कॉन्सर्ट में आने वाले युवा अक्सर पुराने बॉलीवुड म्यूजिक की बात करते हैं। इससे यह साफ होता है कि पुराने हिंदी फिल्म गानों की याद और उनकी लोकप्रियता आज भी नई पीढ़ी के बीच मौजूद है। हालांकि, मौजूदा समय में म्यूजिक रिलीज का तरीका, सोशल मीडिया प्रमोशन, रील्स और ऑडियंस का कंटेंट कंजम्पशन काफी बदल चुका है।
हर दिन करीब 300 गाने रिलीज होने का हिमेश का दावा
बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री के सामने आज सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बढ़ता म्यूजिक कॉम्पिटिशन है। हिमेश रेशमिया के मुताबिक, सभी भाषाओं को मिलाकर एक दिन में करीब 300 गाने रिलीज होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में म्यूजिक रिलीज होने के कारण किसी एक गाने को लंबे समय तक दर्शकों का ध्यान मिलना मुश्किल हो गया है। हिमेश ने यह भी स्पष्ट किया कि वह नए म्यूजिशियन को खराब नहीं बता रहे हैं। उनके मुताबिक, कई नए कंपोजर और आर्टिस्ट अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन म्यूजिक मार्केट में मौजूद भारी मात्रा के कारण किसी गाने को ऑडियंस तक लंबे समय तक पहुंचाना चुनौती बन गया है।
एक गाने को हिट होने में लग सकता है एक साल से ज्यादा
हिमेश रेशमिया ने कहा कि आज किसी गाने के रिलीज होते ही सुपरहिट होने की स्थिति जरूरी नहीं है। उनके मुताबिक, किसी गाने को सुपरहिट होने में एक साल से ज्यादा समय लग सकता है।
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह म्यूजिक मार्केट में बढ़ता कंटेंट और लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। हर दिन सैकड़ों गाने रिलीज होने के कारण नए गाने के सामने ऑडियंस का ध्यान खींचने और उसे लंबे समय तक बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।
क्या 3 मिनट का गाना ही हिट होता है?
फिल्मी गानों की लंबाई को लेकर भी हिमेश रेशमिया ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि पहले 6 मिनट लंबे गाने भी सुपरहिट हो जाते थे। अब ऐसी उम्मीद की जाती है कि करीब 3 मिनट का गाना भी रील्स और थिएटर में असर पैदा करे। लेकिन हिमेश के मुताबिक, सिर्फ गाने को छोटा कर देने से उसके हिट होने की गारंटी नहीं होती। उन्होंने अपने गानों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उनके कुछ 7 मिनट लंबे गाने भी रील्स पर छोटे गानों जितना प्ले हुए हैं।
सिर्फ छोटा गाना बनाना हिट होने की गारंटी नहीं
आज म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने की लंबाई को लेकर एक तरह का फोकस जरूर बढ़ा है, लेकिन हिमेश की बातों का अहम हिस्सा यह है कि गाने की लंबाई ही उसकी सफलता का अकेला पैमाना नहीं है। अगर किसी गाने की धुन, बोल, आवाज और प्रस्तुति ऑडियंस से जुड़ती है, तो उसकी लंबाई कम या ज्यादा होना अकेला निर्णायक फैक्टर नहीं हो सकता। यही वजह है कि फिल्म म्यूजिक में अब गाने की लंबाई, रील्स पर परफॉर्मेंस, थिएटर इम्पैक्ट, शूटिंग बजट और ऑडियंस कनेक्शन जैसे कई पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है।
बॉलीवुड म्यूजिक में क्यों बदल गया पूरा गणित?
हिमेश रेशमिया के बयान से बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में हो रहे कई बदलाव सामने आते हैं। फिल्मों में कम गाने, बढ़ता म्यूजिक कंटेंट, सोशल मीडिया और रील्स का प्रभाव, गानों की शूटिंग का खर्च और बदलता ऑडियंस कंजम्पशन—इन सभी ने फिल्मी संगीत की रणनीति को प्रभावित किया है। यानी 14 गानों से 10 और फिर 6 गानों तक का सफर सिर्फ संख्या में कमी नहीं है। यह हिंदी फिल्म म्यूजिक के बदलते प्रोडक्शन और प्रमोशन मॉडल की ओर भी इशारा करता है।
‘ये प्रेम मोल लिया’ में कौन-कौन नजर आएगा?
सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में आयुष्मान खुराना, शरवरी, अनुपम खेर, सीमा पाहवा और सुप्रिया पाठक कपूर अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म में हिमेश रेशमिया म्यूजिक से जुड़े हैं।
फिल्म का म्यूजिक लॉन्च 20 सितंबर 2026 को हुआ और फिल्म 27 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
बॉलीवुड फिल्मों में गानों का नया दौर
बॉलीवुड में फिल्मी गानों की भूमिका खत्म नहीं हुई है, लेकिन उनका फॉर्मेट और बिजनेस मॉडल बदल रहा है। जहां पहले ज्यादा गाने फिल्म की पहचान और प्रमोशन का अहम हिस्सा होते थे, वहीं अब निर्माता गानों की संख्या के साथ-साथ बजट, शूटिंग टाइम, प्रमोशन, डिजिटल म्यूजिक, रील्स और ऑडियंस रिस्पॉन्स को भी ध्यान में रखते हैं। हिमेश रेशमिया के मुताबिक, इसी बदलते माहौल ने फिल्मों में गानों की संख्या और उनकी लंबाई के पुराने फॉर्मूले को बदल दिया है।
निष्कर्ष
बॉलीवुड फिल्मों में गाने कम होने की कहानी सिर्फ 14 से 6 गानों तक पहुंचने की कहानी नहीं है। इसके पीछे फिल्म म्यूजिक का बदलता बजट, शूटिंग कॉस्ट, प्रमोशन, सोशल मीडिया, रील्स, बढ़ता म्यूजिक कंटेंट और बदलता ऑडियंस कंजम्पशन शामिल है। हिमेश रेशमिया के बयान ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि आने वाले समय में बॉलीवुड फिल्मों का म्यूजिक कितने गानों का होगा और क्या 3 मिनट का फॉर्मूला ही चलेगा?